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BOD क्या है?BOD का पूरा नाम,मापने के पद्धति से जुड़ी प्रमुख जानकारियां।

 नमस्कार दोस्तों आशा है आप अच्छे होंगे।और अपने आप का ख्याल रखते होंगे।दोस्तों आज हम एक जरूरी जानकारी जानने वाले हैं।वैसे तो यह जानकारी डिटेल में बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट में पढ़ाए जाते हैं।लेकिन हो सकता है इसके बेसिक जानकारी आपको 11 और 12 क्लास के किताबों में मिल जाए।
 आपको बहुत ही बेसिक जानकारी लग सकता है।आज हम इसको डिटेल में पढ़ने वाले हैं!
 जी हां दोस्तों वैसे आप शायद जान चुके होंगे कि आज हम किसके बारे में जानने वाले हैं।
 
 आज हम BOD के बारे में जानने वाले हैं। आप शायद जानते होंगे। BOD का पूरा नाम होता है पी बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी हिंदी में कहे तो बायोकेमिकल ऑक्सीजन मांग। 
 जिसको साधारणतः गहराई से किसी इंजीनियरिंग विभाग में ही पढ़ाया जाता है। जैसे कि BOD को Environmental इंजीनियरिंग में ज्यादा पढ़ाया जाता है।लेकिन अगर आप इसके बारे में थोड़ा बहुत नहीं जानते हैं तो शायद आप कुछ जानकारी miss कर रहे हैं।
 
 वैसे आपको बता दें आज हम इस आर्टिकल में BOD कर लेकर बहुत ही गहराई से जानकारी पाने वाले हैं। ऐसे में दोस्तों इस आर्टिकल को आप अंत तक जरूर पढ़े,ताकि आपको BOD के बारे में बिल्कुल गहराई से ज्ञान मिल पाए।
 और आप की मन में कोई भी सवाल या कोई भी कन्फ्यूजन ना रहे।तो चलिए देखते हैं बीओडी के बारे में।

BOD क्या है?

bod kya hai
Bod क्या है!

जैसे कि मैंने बताया कि बीओडी, इंजीनियरिंग में ज्यादा पढ़ाया जाता है।और तो और दोस्तों इसको और भी कई जगह गहराई से पढ़ाया जाता है। लेकिन आज हम इसके थोड़ा बहुत जानकारी पाने वाले हैं। और कुछ BOD के बारे में इधर-उधर के चीजें भी हम जानने वाले हैं। बीओडी यानी बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड। आप शायद नाम से ही थोड़ा बहुत पता कर पा रहे हैं।जी हां!
 शायद आप थोड़े बहुत अंदाजा लगा रहे हैं। लेकिन दोस्तों हमें इसके बारे में जानने से पहले, जानना पड़ेगा कि आखिरकार डिस्सोल्व ऑक्सीजन यानी घुलित ऑक्सीजन क्या होता है।
  और बाद में हम इस तरीके का और भी ऑक्सीजन डिमांड के बारे में बात करेंगे। तो चलिए पहले पढ़ते हैं dissolve ऑक्सीजन क्या होता है इसके बारे में।यानी DO क्या होता है इसके बारे में।

DO क्या होता है?


आप शायद जानते होंगे कि पानी में कोई भी इंसान सांस नहीं ले सकता। हमारे फेफड़ा इसके लिए बना नहीं है। लेकिन दोस्तों क्या आप कभी सोचे हैं कि पानी में रहने वाले जीव कैसे गुजर बसर करते हैं।उनको भी तो कुछ ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती होगी।

असर में दोस्तों पानी में भी ऑक्सीजन रहता है। लेकिन वह घुलित होकर रहता है। यानी कहे तो ऐसे रहता है जिसको सिर्फ पानी में रहने वाले जीव ही ग्रहण कर सकता है। और तो और घुलित ऑक्सीजन आखिरकार पानी में कितना है यह बता रहा है की पानी कितना स्वच्छ है।

अगर मान लीजे पानी में ज्यादा घुलित ऑक्सीजन होगा तो पानी ज्यादा स्वच्छ होगा और अगर कम है तो पानी निश्चय गंदा है और उसमे पानी के पेड़ पौधे बढ़ रहे हैं।

यहां पानी में कितना घुलित ऑक्सीजन हो सकता है इसी के बारे में बात कर रहे हैं, उसी तरह इंजीनियरिंग में पढ़ाया जाता है किस Sewage में DO कितना रहे ताकि उसे जांचा जा सके ठीक से की कितने और ऑक्सीजन देना पढ़ सकता है। 

बहरहाल यह बहुत गहराई वाला हो गया। हम यहां सिर्फ DO के बारे में ही जानकारी पाने वाले हैं। ऐसे में दोस्तों आपको बता देते हैं 20° c में जो DO पानी में रहता है वह 9.2 mg/l है।
मछली ऑन के जिंदा रहने के लिए 4mg/l घुलित ऑक्सीजन रहना आवश्यक है।

दोस्तों इंजीनियरिंग में बहुत से ऑक्सीजन डिमांड को पढ़ाया जाता है। खासकर Environmental इंजीनियर की बात करें तो उसमें ज्यादातर तीन तरह का ऑक्सीजन डिमांड का पढ़ाया जाता है। एक तो है केमिकल ऑक्सीजन डिमांड जिसे COD भी कहा जाता है,एक है थ्योरिटिकल ऑक्सीजन डिमांड और और एक है बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड। 

जी हां BOD जिसके बारे में ही हम इस आर्टिकल में बारीकी से पड़ने वाले हैं।जैसे कि मैंने ऊपर कहा कि पानी में किसी चीज को अगर जिंदा रहना है तो उसको ऑक्सीजन चाहिए। और जितना ऑक्सीजन रहता है पानी में उतना ही अच्छा है पानी,ऐसा देखा गया है। 

अगर मान लीजिए किसी पानी में DO बोहोत अच्छा है तो उस पानी अच्छा रहता है। क्यूं?
क्यूंकि उस पानी ज्यादा गंदगी नही है।

अच्छा गंदगी से DO का क्या संबंध?यहां आपको बता दे पानी का एक गुण है की वो खुद से ठीक हो सकता है।यहां ठीक मतलब Quality अच्छा हो सकता है,पीने लायक का नही बात कर रहा हूं।यही है DO का जादू।
अगर मान लीजे पानी में कोई कचरा गया तो पानी में मौजूद DO उसे तोड़ने की कोशिश करता है।
और तबतक ये होता है जबतक कचरा ठीक तरह समाप्त न हो जाए।और मान लीजे DO खत्म हो गई और अभी जैव पदार्थ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ,तब बाहर से OXYGEN लग सकता है।
उसी तरह दोस्तों पानी में किसी जैव चीज को तोड़ने में भी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जी हां दोस्तों!

 आज उसी के बारे में हम विस्तार से बात करने वाले हैं।आपने सही पड़ा कि Biochemical ऑक्सीजन डिमांड इसे से कुछ संबंधित ही है। अब क्या है। तो चलिए इसको विस्तार से जानते हैं।

BOD का मतलब


बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी, यह उस ऑक्सीजन डिमांड को कहा जाता है जो पानी में किसी biodegradable जैव पदार्थ को तोड़ने में यानी टेक्निकल भाषा में कहें तो ऑक्सीडेशन में काम आता है।

 जी हां दोस्तों इसीलिए बीओडी ज्यादातर आपको sewage जैसे विषय को गहराई से पढ़ने के द्वोरान पढ़ना पड़ता है। जो sewage ट्रीटमेंट के बारे में पढ़ाई कर रहा है उसको बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड भी पढ़ना पड़ता है।

बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड,इस मांग को ऑक्सीजन दे कर पूरा किया जाता है।कैसे?

किसी शुद्ध पानी जिसमे DO ज्यादा हो,उसको मिलाया जाता है उन पानी में जिसमे ऑक्सीजन चाहिए।
ऐसे में धीरे धीरे उस पानी का Quality में काफी सुधार देखा जाता है।
ऐसा भी नहीं की ये करने से पानी को पिया जा सकता है।ये सिर्फ पानी के Quality ठीक करने के लिए किया जाता है।
दोस्तों बीओडी के मापने के लिए भी बहुत से उपाय है। अगर बात करें बीओडी पानी की। तो पानी की BOD, 5 दिन के भीतर 20°c में जो होता है उसको स्टैंडर्ड बीओडी माना जाता है। जो कि लगभग 67% होता है Ultimate BOD के। 

BOD कैसे निकाला जाता है?


दोस्तों बीओडी निकालने के लिए सबसे पहले Dilution Factor निकाला जाता है। बाद में  प्राथमिक घुलित ऑक्सीजन से अंतिम घुलित ऑक्सीजन को घटाया जाता है। और फिर जितना मिला उसको इस Dilution Factor से गुणा किया जाता है।इस तरह BOD निकाला जाता है।
वातित जल की ज्ञात मात्रा के साथ अपशिष्ट जल के नमूने की ज्ञात मात्रा को मिलाया जाता है।और बाद में फिर Diluted नमूने का DO का गणना किया जाता है। Diluted नमूना फिर 5 दिनों के लिए 20 डिग्री सेंटीग्रेड पर लगाया जाता है। 5 दिनों के अंत में फिर से गणना की जाती है। ऐसे BOD का पता लगाया जाता है।

दोस्तों बीओडी में जो पहला ऑक्सीजन मांग होता है जिसमे ऑक्सीडेशन होता है जैव पदार्थ का,उसको Carbonaceous Demand कहां जाता है। तथा फर्स्ट स्टेज डिमांड कहा जाता है।और बाद में जो मांग होता है वह 2nd स्टेज डिमांड कहलाता है।उसको Nitrogenous Demand बोला जाता है।

BOD से जुड़ी कुछ सवाल जवाब


1) BOD क्या है?
उत्तर:- पानी में मौजूद पदार्थ को तोड़ने के लिए जो अलग से ऑक्सीजन लगता है उसको ही Biochemical ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी कहा जाता है।

2) BOD का फुल फॉर्म क्या है?
उत्तर:- BOD का पूरा नाम होता है Biochemical Oxygen Demand।

3) COD का पूरा नाम क्या होता है?
उत्तर:- Chemical Oxygen Demand।

Conclusion


तो दोस्तों बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी के बारे में शायद इस आर्टिकल से आप कुछ नई जानकारी जाने होंगे।आशा है आपको यह आर्टिकल पढ़कर अच्छा लगा होगा। हमने यहां बीओडी के बारे में आसान भाषा में लिखा है। शायद आपको अच्छा लगा होगा।

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तो आज के लिए इतना ही आपसे फिर मुलाकात होगा एक नए ओर knowledgefull पोस्ट के साथ।तब तक के लिए खुश रहिए,मजे में रहिए ओर हां अवश्य Mask पहने ओर अपने हाथ को बार बार sanitize करे।
                        जय हिन्द
                               बंदे मातरम

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