हेलो नमस्कार दोस्तों आशा है आप अच्छे होंगे। और अपने आप का ख्याल रख रहे होंगे। दोस्तों आज के आर्टिकल में हम बहुत ही रोमांचक चीज के बारे में चर्चा करने वाले हैं। जी हां दोस्तों यह सब चीजें आजकल लोग इतना जानते भी नहीं है।लेकिन यह बहुत पहले से ही मौजूद है। जी नहीं मैं कोई जगह की नहीं बात कर रहा हूं। बल्कि मैं यहां एक राज्य की संस्कृति के बारे में ही चर्चा करने वाला हूं।वैसे दोस्तों हम कल एक राज्य की संस्कृति से जुड़ी एक चीज को विस्तार से लिखे थे, जी हां बढार!
शायद आपने एक बार पढ़ा होगा।अगर नहीं पड़े तो जरूर उसे पढ़ ले। वह बहुत ही रोमांचक तथ्य हो सकता है आपके लिए।
बहरहाल आज भी जिसके बारे में हम चर्चा करने वाले हैं वो राजस्थान की ही संस्कृति का एक हिस्सा है।या कहे राजस्थान के संस्कृति में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है। जी हां असल में यह चीज राजस्थान में ही देखा जाता था। इसलिए आप कह सकते हैं कि यह राजस्थान की संस्कृति का ही एक हिस्सा है।
वैसे दोस्तों क्या कहने वाले हैं टाइटल पढ़कर ही पता कर लिय होंगे।जी हां बालद के बारे में आज हम विस्तार से जानने वाले है।जैसे दोस्तों अगर नाम को ध्यान से पढ़ा जाए तो भी थोड़ा सा मालूम चल जाता है किस बारे में शायद हो सकता है।
हालांकि हम कन्फ्यूजन में भी पढ़ सकते हैं। इसलिए ऐसा मत कीजिए।आर्टिकल पढ़िए जी हां अंत तक पढ़े।ताकि आपके मन में confusion ना हो। चलिए देखते हैं आर्टिकल को।
बालद क्या है?
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बालद |
पहले के जमाने में लोग पैदल चला करते थे। तभी उतना वाहन मौजूद नहीं था।लेकिन जो सबसे पॉपुलर वाहन तब की समय था वह ज्यादातर गधे या बैल की सवारी माना जाता था। आप तो सुने होंगे कि राजाओं के पास घोड़े होते थे।लेकिन घोड़े सबके पास नहीं होते थे। ज्यादातर बैल और गधे जैसे पशु के द्वारा ही एक वाहन बनाया जाता था।
जी हां दोस्तों अगर आप गांव में जाएंगे तो आपको गांव में अभी भी वैसे वाहन देखने को मिलेंगे।लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि तब वह सड़क परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अभी के समय वह वाहन ज्यादातर खेत में देखा जाता है।हालांकि कहीं कहीं एक तरफ से दूसरी तरफ या गांव से बाजार आने के लिए इस तरह के वाहनों का इस्तेमाल होता होगा अभी भी।
लेकिन ज्यादातर मैंने जैसे कहा कि खेत में भी ऐसा वाहन अभी के समय इस्तेमाल होता है। अब अगर आप गांव में रहते हैं,तो आप तो यह देखे ही होंगे।
अगर आप शहर में रहते हैं और देखना चाहते हैं तो आपको गांव जाना पड़ेगा।क्योंकि यह सब गांव में ही होता है।शहर में उतना ज्यादा खेती नहीं किया जाता।गांव में ही खेती किया जाता है इसलिए किसान अपने साथ बैल भी रखते हैं। आपको शायद अब हैरानी हो रहा होगा कि मैं यह क्या कह रहा हूं।
संस्कृति पहले बात की थी! लेकिन अभी मैं यह सब क्यों कह रहा हूं।असल में दोस्तों एक तरह से देखा जाए तो वह भी एक अलग कल्चर है। आप अगर सोच कर देखेंगे कि आज के समय पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से कितना ही ना पोलूशन होता है। अगर आपको कभी 100 साल या 200 साल पीछे जाने का मौका मिला तब शायद आप इसका अंतर समझ पाएंगे। क्योंकि उस टाइम उतना पोलूशन जो आज के गाड़ियों के द्वारा होता है वो नही होता था।
आपको एक अच्छा चीज बताया इसके बारे में। लेकिन यह एक हमारा गौरव संस्कृति भी है। आजकल वैसे वाहन सड़क पर चलते दिखाई नहीं देता। भागदौड़ वाली जिंदगी में वह कहीं खो गया है।जैसे कि मैंने कहा कि यह हमारे संस्कृति का ही हिस्सा है।राजस्थान इसका एक नाम भी है।
बालद जो शब्द है वह इसी से कुछ संबंध है। अगर आपसे कहे कि बालद का मतलब क्या हो सकता है तो क्या बता पाएंगे।
बालद का मतलब
अब तो शायद आपके मन में थोड़ा बहुत आईडिया हो ही गया होगा। कि इसका मतलब क्या हो सकता है।मैंने Hints तो दे ही दिया आपको। कि क्या होगा!
जी हां मैं आर्टिकल ऐसे ही लिखना पसंद करता हूं, ताकि पढ़ने वालों को भी थोड़ा रोमांचक लगे।बहरहाल आपको बता दें कि बालद शब्द बैल से संबंध ही है।या कहे बालद से संबंधित है। क्योंकि बालद इस शब्द में कहीं ना कहीं बैलों की शब्द जैसी भाव प्रकट होते हैं। मैंने यह आइडिया लगाने के लिए ही इस तरह से कहा। इसका शाब्दिक मेल शायद ना भी हो।
असल में दोस्तों राजस्थान में ज्यादातर बंजारे अपने बैलों को समूह के साथ एक से दूसरे जगह व्यापार करने के लिए जाते थे। और तब बंजारे साथ में सामान भी ले जाते थे। कैसे ले जाना पड़ेगा?
तब बैलों की सहारा लिया जाता था। तब उस समय बहुत सारी चीजें जो व्यापार करने के लिए लिया जाता था, बैलों के पीठ पर दे देते थे और बैलों को उनके साथ ले जाते थे। दोस्तों तब से ही इन बैलों के समूह को बालद कह जाने लगा। ये तरीका पहले जमाने के लोगों के द्वारा सिर्फ राजस्थान में ही नहीं किया जाता बल्कि हर जगह बाहनों को या कहे बैलों के गाड़ी से अपने व्यवसाय किया करते थे।
यहां तक कि सड़क परिवहन के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था।लेकिन राजस्थान में इन बैलों के समूह को बालद कह जाते थे।
बालद शब्द किस लिए अहम है?
इस आर्टिकल का या कहे इस ब्लॉग का मकसद यही है कि लोगों को साधारण ज्ञान से जुड़ी हर तथ्य को उनके पास पहुंचाया जा सके। ऐसे में इस शब्द को बताने का लक्ष्य भी हमारा यही है कि सब लोग इसके बारे में जानकारी जुटा पाए।
हालांकि दोस्तों यह आर्टिकल इंटरनेट रिसर्च करके ही लिखा गया है।इस तथ्य को जुटाने के लिए इंटरनेट सर्च का सहारा लिया गया है। लेकिन दोस्तों ये शब्द तो बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।क्योंकि कभी-कभी परीक्षाओं में खासकर सरकारी नौकरी के परीक्षा में यह सवाल बहुत बार किया जाता है।
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बालद के बारे में जानकारी रखना भी एक तरह से हमारे गौरवमई इतिहास को जानना भी है। जैसे कि मैंने पहले बताया कि तब लोग पशु ऑन को पालते थे। और सड़क परिवहन हो या खेती हो या फिर व्यवसाय हर चीज में पशुओं को इस्तेमाल किया जाता था। उस टाइम आज के जैसा डीजल या पेट्रोल गाड़ी की तरह पोलूशन भी नहीं था।आप सोच भी नहीं सकते कि उस टाइम वायु कितना शुद्ध हुआ करता था।
जब भी हम बालद के बारे में पढ़ेंगे शायद हमारे सामने हमारे पूर्वजों के पुराने समय की चित्र हमारे कल्पना में प्रकट होने लगेगी।
बालद से जुड़ी कुछ सवाल जवाब
1) बालद शब्द का मतलब क्या है?
उत्तर:- इसका मतलब उन बैलों के समूह से है जिसके पीठ में माल रख कर बंजारे एक जगह से दूसरे जगह बैपार के लिए जाते थे।
2) बेलों के समूह को बालद कहां बोला जाता है?
उत्तर:- राजस्थान में।
Conclusion
आशा है आप बालद के बारे में विस्तार से जाने होंगे। शायद आपको यह आर्टिकल पढ़कर कुछ नई जानकारी जानने को मिली होगी। अब शायद मेरी उम्मीद है कि आप बालद के बारे में विस्तार से जान चुके होंगे।
ऐसे में आपसे यही कहना की अगर आपको ये आर्टिकल थोड़ा सा भी ज्ञानवर्धक लगा हो तो जरूर इसे सोशल मीडिया में शेयर करें।ताकि औरों को भी इसके बारे में पता चल सके।
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तो आज के लिए इतना ही आपसे फिर मुलाकात होगा एक नए ओर knowledgefull पोस्ट के साथ।तब तक के लिए खुश रहिए,मजे में रहिए ओर हां अवश्य Mask पहने ओर अपने हाथ को बार बार sanitize करे।
जय हिन्द
बंदे मातरम
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