नमस्कार दोस्तों आज आपके सामने हाजिर हूं एक Knowledgefull पोस्ट के साथ।आशा है आप अच्छे होंगे और अपने परिवार का ख्याल रख रहे होंगे आज के विषय कुछ अलग होने वाला है।
जी हां आज हम इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण चीज पढ़ने वाले हैं।हो सकता है आप में से बहुत लोग इसके बारे में जानते होंगे लेकिन ऐसे भी बोहोत से लोग है जो इसके बारे में पूरी तरीके से नहीं जानते हैं।तो आज के आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए ही है।
हालांकि क्या विषय है यानी किस बारे में है आज हम पढ़ने वाले हैं यह तो शायद टाइटल पढ़ कर ही पता लगा लिए होंगे।जी हां आज हम विजयनगर साम्राज्य के बारे में पढ़ने वाले हो और जानने वाले हैं विजयनगर साम्राज्य की राजधानी क्या है।
वैसे ये नाम आप कहीं न कहीं जरूर सुने होंगे, लिकिन पूरी तरीके से ये असल में है क्या ये नही जानते होंगे। लिकिन ये आर्टिकल पढ़ने के बाद साम्राज्य के बारे में पूरी जानकारी पा जाएंगे इसलिए आप इस आर्टिकल को अंत तक पूरा पढ़ें ताकि आपको विजयनगर साम्राज्य के राजधानी और विजयनगर साम्राज्य के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
So Let's begin
विजयनगर साम्राज्य कि राजधानी कहां थी?
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विजयनगर साम्राज्य |
विजयनगर साम्राज्य एक समय में दक्षिण के सबसे बड़े साम्राज्य में से एक था।इस साम्राज्य में बोहोत से राजा ब बोहोत से बंशो ने राज किया।
अभी के समय की भारत के डेक्कन पठार में ये विजयनगर साम्राज्य फैला हुआ था।
आज के समय में ऐसे बोहोत से चीज मिला है जिससे इस साम्राज्य का बेभव के बारे में पता चलता है।
विजयनगर साम्राज्य के बारे में बाहरी देश से आए हुए नागरिकों की लेखन से तथा बोहोत से लिपि ऑन से भी पता चलता है।
और तो और वर्तमान समय के कर्नाटक राज्य में मिले अवशेषों से भी बोहोत कुछ मिला है।
यहां के मौजूद आर्किटेक्चर आज भी उस समय का स्वर्णिम काल का गबाही देता है।
दक्षिण भारत में ये सबसे प्रमुख साम्राज्य में से एक माना जाता है।शायद यही वजह है कि आज हम सब विजयनगर साम्राज्य के बारे में इतिहास मे पढ़ते हैं।
विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक कोन थे?
विजयनगर साम्राज्य एक मध्यकालीन साम्राज्य है।इसके सुरबात 1336 में हो गया था।
हरिहरा १ और बुक्का १ इन दोनो भाइयों के द्वारा इस साम्राज्य का नींव तुंगभद्रा नदी के दक्षिण तट पर रखा गया था।जो आजके डेक्कन पठार पर स्तिथ थी।
उसके बाद बोहोत से राजवंश के राजाओं ने इस साम्राज्य को चलाया था।
विजयनगर साम्राज्य के नींव रखने वाले हरिहरा १ और बुक्का १ दोनो ही संगमा राजवंश के राजा थे।
1336 में हरिहरा १ ने इस साम्राज्य के राजा बने थे।जो मदुराई और मैसूर को जीत कर विजयनगर साम्राज्य के सीमा को और बढ़ाए थे।
और इसके कुछ समय के बाद ही विजयनगर साम्राज्य भारत के पूरी दक्षिण में फैल गया था।
हरिहरा १ के बाद 1356 में इस साम्राज्य का नींव रखने वाले एक और इंसान बुक्का १ इस साम्राज्य के राजा के कार्यभार संभाले थे।
विजयनगर साम्राज्य के राजधानी के नाम
विजयनगर के साम्राज्य के नाम इसके राजधानी के नाम पर पढ़ा था।
जी हां विजयनगर साम्राज्य का राजधानी विजयनगर था,जो की आज के समय में Hampi है।
आपको शायद पता नही होगा ये Hampi एक UNESCO world heritage site है।
Wikipedia के एक लेख के मुताबिक इसके और तीन राजधानी मौजूद थे जिसके नाम है पेनुकोंडा,चंद्रगिरी और वेल्लोर।
हालांकि बोहोत से Source विजयनगर को ही प्रमुख राजधानी मानते हैं।
विजयनगर साम्राज्य को कितने राजबंशो ने चलाया?
विजयनगर साम्राज्य, भारत में 14 शताब्दी में सबसे बड़े साम्राज्य में से एक माना जाता था।करीब 3 दशक तक बोहोत से बंशों के राजाओं ने विजयनगर साम्राज्य को चलाया था।
जो जो राजवंश के राजा इस साम्राज्य का शुरू से ले कर अंत तक कार्यभार संभाले थे उनके नाम है
संगमा राजवंश |
हरिहरा १ | 1336–1356 |
बुक्का राया १ | 1356–1377 |
हरिहरा राया २ | 1377–1404 |
विरूपक्ष राया | 1404–1405 |
बुक्का राया | 1405–1406 |
देवा राया १ | 1406–1422 |
रामचंद्र राया | 1422 |
वीरा विजया बुक्का राया | 1422–1424 |
देवा राया २ | 1424–1446 |
मल्लिकार्जुन राया | 1446–1465 |
विरुपक्ष राया २ | 1465–1485 |
प्रौधा राया | 1485
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सलुवा राजवंश |
सलुवा नरसिम्हा देवा राया | 1485–1491 |
थिम्मा भूपाला | 1491 |
नरसिम्हा राया २ | 1491–1505 |
तुलुवा राजवंश |
तुलूवा न्यासा रायक | 1491–1503 |
वीरा नरसिम्हा राया | 1503–1509 |
कृष्ण देवा राया | 1509–1529 |
अच्युत देवा राया | 1529–1542 |
वेंकट १ | 1542 |
सदाशिव राया | 1542–1570 |
अरविदु राजवंश |
आलिया रामा राया | 1542–1565 |
त्रिमुला देवा राया | 1565–1572 |
श्रीरंगा १ | 1572–1586 |
वेंकट २ | 1586–1614 |
श्रीरंगा २ | 1614 |
रामा देवा राया | 1617–1632 |
वेंकट ३ | 1632–1642 |
श्रीरंगा ३ | 1642–1646 |
विजयनगर साम्राज्य जिसको karnata kingdom भी कहा जाता है,इसके सबसे प्रसिद्ध राजाओं में से एक था तुलुवा राजवंश के कृष्ण देवा राया।कृष्ण देवा राया ने करीब 1509 से 1529 तक शासन किया था।
उस समय आए हुए एक यूरोपियन यात्री
Domingo Paes ने भी कृष्ण देवा राया की बोहोत ही तारीफ कि थी।
कृष्ण देवा राया के समय पर विजयनगर साम्राज्य उत्तर के कृष्णा नदी से ले कर के दक्षिण के कावेरी नदी तक फैल गया था।
कृष्ण देवा राया के कुशल नेतृत्ब में विजयनगर साम्राज्य में व्यापार, अर्थबेबस्था में काफी इजाफा हुआ था।
और तो और साहित्य में भी कृष्ण देवा राया के बोहोत रुचि था।
विजयनगर साम्राज्य में कन्नड़ और तेलेगु से ले कर तमिल और संस्कृत भाषा को भी साहित्य में जगह दिया गया था।
विजयनगर साम्राज्य के पतन कैसे हुआ?
1529 में कृष्ण देवा राया के मृत्यु के बाद ये विजयनगर साम्राज्य की पतन की ओर अग्रसर हो चला था।
कृष्ण देवा राया के बाद आए राजाएं कृष्ण देवा राया जैसे उतना कुशल नही थे।
इस युद्ध में अरबिंदु राजवंश के आलिया रामा राया के साथ अहमदनगर सुल्तानात, बीजापुर सुल्तानात, गोलकोंडा सुल्तानत संयुक्त रूप से लड़ा था।जिसमे आलिया रामा राया को हार का सामना करना पढ़ा था।
इसिको बोहोत लोग विजयनगर साम्राज्य के पतन के मुख्य कारण मानते हैं।
हालांकि विजयनगर साम्राज्य और भी 81 साल चला था।लिकिन बार बार बीजापुर और अलग अलग सुल्तानात के साथ युद्ध में विजयनगर साम्राज्य टूट गया।
विजयनगर साम्राज्य से जुड़ी कुछ सवाल जबाब
1)विजयनगर साम्राज्य के राजधानी कहां थी?
उत्तर:- विजयनगर।अभी के समय के Hampi में।
2)विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध राजा कोन थे?
उत्तर:- कृष्ण देवा राया।
3)विजयनगर साम्राज्य के मुद्रा क्या था?
उत्तर:- बराह।
4)विजयनगर साम्राज्य को कब स्थापित किया गया था?
उत्तर:- १३३६ में इसके स्थापना हरिहरा १ और बुक्का १ के द्वारा किया गया था।
5)विजयनगर साम्राज्य का पतन कोनसे युद्ध के बाद हुआ?
उत्तर:- तालिकोटा युद्ध।
Conclusion
आशा है आप अच्छी तरह से विजयनगर साम्राज्य के बारे में जान चुके हैं।शायद अब आपको विजयनगर की राजधानी के बारे में पता चल चुका होगा।इस आर्टिकल में विजयनगर साम्राज्य से जुड़ी बोहोत से जानकारियां सरल भाषा में उपलब्ध कराई गई है,ताकि आप सबको पढ़ने में कोई भी तकलीफ न हो।
आशा है आपको ये आर्टिकल पढ़कर अच्छा लगा होगा।अगर सच में आप इस आर्टिकल को पढ़कर कुछ नए जानकारी पाए हैं या आपको ये आर्टिकल बोहोत ही सहयता की तो आप इस आर्टिकल सोशल मीडिया में जरूर शेयर करें ताकि और लोगो को भी ये जानकारियां आसानी से पता चल सके।
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तो आजके लिए इतना ही आपसे फिर मुलाकात होगा एक नए और Knowledgefull पोस्ट के साथ।तब तक के लिए खुश रहिए और मजे में रहिए।
जय हिंद
बंदे मातरम
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