सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शिव तांडव स्तोत्र याद कैसे करे? शिव तांडव स्तोत्र को याद करने का तरीका।

 हेलो नमस्कार दोस्तों को आशा है आप अच्छे होंगे।अपने आप का ख्याल रख रहे होंगे।
दोस्तों आज के आर्टिकल बहुत ही मजेदार और रोमांचक होने वाला है।क्योंकि आज जो हम विषय चर्चा करने वाले हैं वह डायरेक्ट शिवजी से जुड़ी हुई है।
 इंटरनेट पर आजकल बहुत बार सर्च किया जाता है कि कैसे शिव तांडव स्तोत्र को याद किया जा सकता है?
 
 जी हां दोस्तों वही शिव तांडव स्तोत्र जो महाशक्तिशाली असुर महान शिव भक्त रावण के द्वारा लिखी गई है। जिसे रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र भी कहा जाता है। आज हम उसी के बारे में विस्तार से जानने वाले हैं।कि कैसे कोई भी आसानी से शिव तांडव स्तोत्र को याद कर सकता है।
 
 जी हां आप पहले सोचेंगे कि जो यह मैं लिख रहा हूं, क्या मैं शिव तांडव स्तोत्र को अभी याद कर पाया? जी हां दोस्तों में जो रास्ता अपनाया हूं उससे तुरंत शिव तांडव स्त्रोत याद होने लग रहा है। मैं ऐसा नहीं कह सकता कि मुझको पूरा याद है। लेकिन धीरे-धीरे से मैं आसानी से इसको याद कर पा रहा हूं।
 
 जी हां इसीलिए मैं जो रास्ता अपना रहा हूं मैं उसी रास्ता को इस आर्टिकल में लिखूंगा। कि कैसे आप आसानी से शिव तांडव स्तोत्र को याद कर सकते हैं। ऐसे में दोस्तों अगर आप इस आर्टिकल को नहीं पड़ते हैं, छोड़ देते हैं तो शायद आप बहुत बड़ी जानकारी miss कर देंगे।
  क्योंकि मेरे अनुभव ही मैं यहां साझा करने वाला हूं।कि मैं कैसे इसको याद करने की कोशिश कर रहा हूं।और एक दिन जरूर मैं मुझको पूरा याद होने लगेगा।मैं तुरंत किसी को भी सुना सकता हूं। इसीलिए दोस्तों यह आर्टिकल अंत तक पढ़े ताकि आपको कोई कन्फ्यूजन मन में ना रहे, तो चलिए शुरू करते हैं।

शिव तांडव स्तोत्र याद कैसे करे?

शिव तांडव स्तोत्र याद करने का तरीका
शिव तांडव स्तोत्र 

शिवजी जो एक छोटा सा कन में भी हैं, और तो और सब कुछ में भी है! इस दुनिया में ऐसा कोई चीज नहीं है जिसमें शिवजी नहीं रहते।

 शिवजी अनंत है। शिवजी निराकार है, शिवजी साकार भी है। शिवजी स्वतः, रज और तम यह तीन गुणों से ऊपर है। शिवजी कण-कण में बसते हैं। शिवजी पानी में है, शिवजी आकाश में है, शिवजी वायु में है। हर जगह शिवजी ही शिवजी है। और शिव जी के पूजा हरदिन जो लोग करते हैं इस कलयुग में बहुत बड़ी काम कर रहे हैं।
 
 वह धन्य हैं जो हर रोज शिवजी के नाम जपते हैं, और शिवजी की पूजा में लगे रहते हैं। हो सकता है आप भी शिव जी का परम भक्त हैं। या फिर भक्त होना चाहते हैं। तो फिर आप भी लग जाए शिवजी के नाम जपने में। 
  पंचाक्षरी मंत्र आप सब को तो पता ही होगा। ओम नमः शिवाय यह तो हमें भी पता है। आप सब को भी पता होगा। लेकिन अगर मैं कहूं कि आप मुझे शिव तांडव स्तोत्र को सुना कर दीजिए तो शायद आप स्तोत्र को अभी ना बोल पाए।
  
 क्योंकि महापराक्रमी, महा बलशाली, महान शिव भक्त रावण के द्वारा इसका रचना हुई है। शिव तांडव स्तोत्र का एक एक शब्द बहुत ही चमत्कारी शब्द है। आप अगर जपते हैं तो शायद आप इसका महत्व को समझ पाएंगे।
 
 लेकिन आज मैं क्योंकि इस आर्टिकल में इस शिव तांडव स्तोत्र को कैसे याद किया जा सकता है वह बताने वाला हूं।इसलिए आपको इसके बारे में थोड़ा बहुत जानकारी होना अवश्य चाहिए।

अगर आप दिन में एक बार भी शिव जी का वह शिव तांडव स्तोत्र पढ़ते हैं, या फिर सुनते भी हैं तो यकीन मानिए आपको अपने अंदर ऊर्जा महसूस होगा। पता नहीं जब भी शिव तांडव स्तोत्र को जपता है कोई, या फिर सिर्फ सुन लेता है उसके अंदर चमत्कारी शक्ति आ जाता है। जब आप इस स्तोत्र का पाठ करने लगेंगे तब आप भी अनुभव कर पाएंगे।

इस स्तोत्र को आपको जोर दे कर बोलना पड़ेगा। आपको इसको पढ़ने के लिए पूरा confidence के साथ पढ़ना पड़ेगा। तभी आप वैसे शक्ति का अनुभव कर पाएंगे। 

जैसे आप ने सुने होंगे शिव तांडव स्तोत्र के यूट्यूब में। वैसा ही आपको भी निरंतर जप करते रहना होगा। तभी आप देखेंगे कि आपके अंदर एक एनर्जी आ चुका है।इसको आप अगर निरंतर जपते रहते हैं तो आपको अंदर एक अलग ऊर्जा आ जाएगी।
दोस्तों यह मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है। बस आपको इसे हर दिन शिवजी के समक्ष होकर या फिर पूजा घर में पाठ करना है। तब आप उस शक्ति को समझ पाएंगे। अगर आप इस स्तोत्र को पूरा पढ़ना चाहते हैं, तो मैंने इस स्तोत्र को यहां पूरा लिखा है।आपको यह जबरदस्त लगेगा एक बार जरूर इसको खुद से पढ़ने की कोशिश करें।

पूरा शिव तांडव स्तोत्र


महान शिव तांडव स्तोत्र नीचे लिखा गया है-


सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम्
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥१॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥२॥

धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे(क्वचिच्चिदम्बरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥४॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥५॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ॥६॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥८॥

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥९॥

अगर्व सर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥१०॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥११॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रव्रितिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ॥१२॥

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥१३॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदङ्गजत्विषां चयः ॥१४॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥१५॥

इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥१६॥

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ॥१७॥

इति श्रीरावण कृतम्
शिव ताण्डव स्तोत्रम्स म्पूर्णम्

शिव तांडव स्तोत्र याद करने का तरीका


दोस्तों इस स्तोत्र में बहुत से अनगिनत डिफिकल्ट शब्द है। जिसे आप एक बार पढ़ कर तो कभी भी याद नहीं कर सकते। आपको दिन-रात जप करना पड़ेगा। या फिर हर दिन करीब एक महीना तक एक बार जरूर पढ़ना होगा।तभी जाके इसको आप सिर्फ पढ़ पाएंगे। और याद करने के लिए आपको निरंतर उस पढ़ाई को जारी रखना पड़ेगा। तो असली तरीका क्या है हम नीचे दे रहे हैं।

सबसे पहले शिव तांडव स्तोत्र बार बार सुने


अगर आप शिव तांडव स्तोत्र को एक बार भी नहीं पड़े हैं।तो आप इसे जल्दी-जल्दी पढ़ नहीं पाएंगे।यह मेरा पर्सनल अनुभव है।इसलिए आपको सबसे पहले शब्दों को कैसे बोला जाता है इसको समझना होगा।

 कि एक-एक शब्द को शिव तांडव स्तोत्र में कैसे बोला जा रहा है,या फिर आप कैसे बोल सकते हैं इसको समझना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले आपको शिव तांडव स्तोत्र को बार बार सुनना होगा।जी हां दोस्तों अगर आप शिव तांडव स्तोत्र को बार-बार सुनेंगे तो शायद आपको हर एक शब्द का उच्चारण बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगा।
 
 हालांकि ऐसा भी नहीं है कि एक-एक दिन आप गाना या फिर शिव तांडव स्तोत्र सुन लिए और आपको वह सब शब्दों का उच्चारण तुरंत मालूम पढ़े। मैंने बहुत दिनों तक शिव तांडव स्तोत्र को सुनता रहा और कुछ समय बाद मुझे इन शब्दों का उच्चारण धीरे-धीरे पता चलता गया।
 
 ध्यान दें मैं ही आप लोगों को मतलब बात नहीं कर रहा हूं। मतलब समझने के लिए तो आपको शायद पूरा संस्कृत समझना होगा।अगर आप बिल्कुल स्पष्ट तरीके से मतलब समझ ने की चाह रखते हैं(क्योंकि वैसे तो आपको बहुत ज्यादा इसके मतलब लिखा हुआ मिल जाएंगे, आप पढ़ पाएंगे उसको लेकिन आपको वह खुशी शायद नहीं मिलेगी)तो आपको संस्कृत सीखना पड़ेगा।
 
 अगर आप पूरा संस्कृत सीख लेते हैं और इसका मतलब अपने से सोचने की कोशिश करते हैं तब तो शायद यह बहुत ही बड़ा चीज होगा आपके लिए।वैसे आप अगर इसका मतलब जानना चाहते हैं तो आप इंटरनेट में इसका मतलब देख सकते हैं,पढ़ सकते हैं।
 Read Also
मैं यहां उच्चारण की बात कर रहा हूं।सिर्फ आपको उच्चारण करना आने के लिए दिन-ब-दिन इस स्तोत्र को सुनना होगा। अगर आप एक संस्कृत स्टूडेंट हैं, संस्कृत लेकर पढ़ाई किए हैं तो आपको यह उच्चारण करने में ज्यादा समस्या नहीं आएगी। लेकिन या फिर आपके आसपास कोई ऐसे शिक्षक मौजूद हैं जो आपको इसके उच्चारण सिखा सके तो आप उनसे थोड़ा मदद ले सकते है। 

लेकिन दोस्तों आजकल अगर आपके पास इंटरनेट मौजूद है,तो आप इसे इसे सुन सकते हैं। बिल्कुल फ्री है।बहुत से बड़े बड़े गायक ने इस स्तोत्र का गाया है।जो बिल्कुल सुनने में बहुत शक्तिशाली लगता है।

इसीलिए सबसे पहला काम आपको जो करना है शिव तांडव याद करने के लिए वह है इसको निरंतर दिन-ब-दिन सुनना। ताकि आप अच्छे से शिव तांडव स्तोत्र के जो शब्द है उसको उच्चारण कर पाएं।

कुछ समय बाद खुद पढ़ना चालू करे


अगर आप शिव तांडव स्तोत्र का एक एक शब्द का उच्चारण ठीक ठाक कर पा रहे हैं।तब आपको खुदसे पढ़ना चालू कर देना है।

इसके लिए आपको एक निर्दिष्ट समय चुन लेना है।और आपको हर दिन उसी समय में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना है।

सबसे अच्छा समय शुभे को ही माना जाता है।खास कर अगर आप ब्रह्म मुहूर्त में उठते हैं तो आपको कम समय में याद होने लग जायेगी।
हालांकि अगर आप उस समय न भी उठ पा रहे हों तो भी चिंता की कोई विषय नहीं है,आप किसी एक समय चुन कर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
लिकिन ध्यान रखे की वो समय में आप हर दिन पाठ कर पाएं।क्यूंकि अगर किसी चीज को पाना है तो आपको continuity का अवश्य ख्याल रखना पड़ेगा।

 हमेशा जोर जोर से पढ़े,और पूरी साहस के साथ पढ़े।हो सके तो आप गाने के जैसा पढ़े।ठीक वैसा जैसे आपने यूट्यूब में शिव तांडव स्तोत्र सुने हैं।आप देखेंगे आपको शिव तांडव स्तोत्र को बोलने के लिए ज्यादा समय की जरूरत नहीं पड़ेगी।
 नही तो शायद आप उतना जल्दी बोल ना पाएं।इसीलिए पूरी मन से पूरी भक्तिभाव के साथ शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

यकीन मानिए दोस्तों जब इस स्तोत्र को आप मन से पड़ेंगे तब आपकी अंदर चमत्कारी ऊर्जा आ जायेगी।आप उस ऊर्जा को अनुभव कर पायेंगे।

ये शायद हर किसी के साथ होता होगा।

दोस्तों अगर आपको शिव तांडव स्तोत्र को पूरा का पूरा याद करना है तो आपको धैर्य रखकर पढ़ते रहना होगा।ऐसा नहीं कि आप सात आठ दिनों में अच्छे से इस स्तोत्र को बिना देखे बोल पाए।
 अगर आपके संस्कृत नहीं आती,तो आपको ज्यादा समय लग सकता है। कितना समय लगेगा यह निर्भर करता है आप कितना मेहनत करते हैं इस स्तोत्र को याद करने के लिए।

Mirror के सामने बोले


आपको शिव तांडव स्तोत्र को याद करने के लिए मिरर के सामने बोलना पड़ेगा।नहीं तो शायद आप यह पता नहीं कर सकते कि कौन से श्लोक में आपकी गलती हो रही है।
 अगर आप मिरर में ठीक-ठाक तरीके से बोल लेते हैं इसका मतलब आप जल्दी-जल्दी इसको याद कर सकते हैं। हमेशा कोशिश करें इस स्तोत्र को जल्दी-जल्दी बोल पाए।क्योंकि जब आप जल्दी-जल्दी बोल पाएंगे इसका मतलब आपको पूरी याद हो चुका है।
 
हालांकि आपको उच्चारण भी सही से करना पड़ेगा।इसके लिए मैंने पहले ही बताया कि आपको उच्चारण ठीक-ठाक करने के लिए क्या-क्या करना होगा।
 बहरहाल दोस्तों आप इन सब तरीकों को फॉलो करके शिव तांडव स्तोत्र को याद कर सकते हैं।लेकिन अगर आप हर दिन नहीं पड़ते हैं,तो शायद आपको यह मालूम ना पढ़ें क्योंकि वैसे देखा जाए तो शिव तांडव स्तोत्र बहुत ही बड़ा है।
  थोड़ा बहुत ही भारी शब्द को यहां लिखा गया है। इसलिए आपको हर हाल में हर दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते रहना है। ताकि आप आसानी से किसी को भी जल्दी-जल्दी बोल पाए।

जब आप मिरर के सामने बोलेंगे, तब आपको पता चल जाएगा की कहां कहां गलती कर रहे हैं। और जहां जहां अब गलती कर रहे हैं उसको किसी कॉपी में लिख लें।और फिर से चाहे तो गाना भी सुने ताकि उस उच्चारण का ठीक से पता चल सके। यहां आपको बता दें की गाना में जैसे सुर के साथ बोला गया है। उसी सुर में आपको शिव तांडव स्तोत्र को बोलना है।आप देखेंगे आपको धीरे-धीरे शिव तांडव स्तोत्र याद होने लगेगा।

शिव तांडव स्तोत्र याद करने से जुड़ी कुछ सवाल जवाब


1) क्या आप शिव तांडव स्तोत्र को आसानी से याद कर पायेंगे?
उत्तर:- जी हां आप भक्तिभाव से पढ़ते हैं,और ऊपर दिए गए नियम को फॉलो करते हैं तो आपको जरूर शिव जी का ये शिव तांडव स्तोत्र याद होने लग जाएगा।

2) शिव तांडव स्तोत्र किसके द्वारा लिखा गया है?
उत्तर:- शिव तांडव स्तोत्र,महान पराक्रमी और महान शिव भक्त असुरराज रावण के द्वारा लिखा गया है।

3) शिव तांडव स्तोत्र का कितनी शक्ति है?
उत्तर:- सनातन धर्म में मौजूद अनेक शास्त्रों में बहुत सारे मंत्र हैं। उन मंत्र में बहुत सी शक्तियां हैं। लेकिन शिव तांडव स्तोत्र एक शिव भक्त के लिए अमृत के समान है। शिव तांडव स्तोत्र को अगर कोई भी पढ़ें तू उसे उस उर्जा के अनुभव होने लगती है।
 दोस्तों ऐसा भी होता है कि शिव तांडव स्तोत्र को अगर हम सुनते हैं यूट्यूब में तो हमको भी इसका शक्ति का अनुभव होने लगता है। इसका मतलब आप समझिए अगर कोई पड़ता है तो उसको कितना शक्ति का अनुभव होगा।

4) शिव तांडव स्तोत्र क्या एक सप्ताह में याद किया जा सकता है? 
उत्तर:- किया जा सकता है और नहीं भी। यह निर्भर करता है आप याद करने के लिए कितनी बार शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हैं। और कितने बार आप शिव तांडव स्तोत्र सुनते हैं, इस मामले में पढ़ना और सुनना दोनों ही महत्वपूर्ण है।

5) शिव तांडव स्तोत्र कब पाठ करें?
उत्तर:- सबसे अच्छा समय हो सकता है ब्रह्म मुहूर्त।

Conclusion


हर हर महादेव!

आशा है आपको यह आर्टिकल पढ़कर अच्छा लगा होगा।शायद आप इस आर्टिकल से शिव तांडव स्तोत्र को कैसे याद किया जा सकता है, यह समझ पाए होंगे। हो सकता है आपको इस आर्टिकल से कुछ न कुछ नई जानकारी जानने को मिला होगा।

ऐसे में आपसे यही कहना की अगर आपको ये आर्टिकल थोड़ा सा भी ज्ञानवर्धक लगा हो तो जरूर इसे सोशल मीडिया में शेयर करें।ताकि औरों को भी इसके बारे में पता चल सके।

ऐसे ही Knowledgefull आर्टिकल को पढ़ने के लिए SaRaisay को सोशल मीडिया में जरूर फॉलो करे।ताकि आप तक नोटिफिकेशन पौंछ ती रहे।

तो आज के लिए इतना ही आपसे फिर मुलाकात होगा एक नए ओर knowledgefull पोस्ट के साथ।तब तक के लिए खुश रहिए,मजे में रहिए ओर हां अवश्य Mask पहने ओर अपने हाथ को बार बार sanitize करे।
                        जय हिन्द
                               बंदे मातरम

टिप्पणियाँ