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हेलरू क्या है? गरासिया जनजाति के बारे में।

 हेलो नमस्कार दोस्तों आशा है आप अच्छे होंगे। और अपने आप का ख्याल रख रहे होंगे।दोस्तों आज का आर्टिकल बहुत ही रोमांचक होने वाला है। दोस्तों वैसे तो आप जानते ही होंगी कि हम आजकल ज्यादातर जनरल नॉलेज वाले आर्टिकल ही लिख रहे हैं। ताकि आप सबको इसके बारे में पता चल सके। इस ब्लॉग में जो जो आर्टिकल लिखा जा चुका है, वह पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अहम माना जा सकता है।

 क्योंकि जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक पर ही यह सारे आर्टिकल लिखे गए हैं। बहरहाल आज के टॉपिक पर आते हैं। आज क्या हम पढ़ने वाले हैं, यह तो आप टाइटल पढ़कर भी पता लगा लिए होंगे।आज के विषय बहुत ही प्रमुख विषय है। हालांकि दोस्तों यह बहुत कम लोग ही जानते हैं।
  क्योंकि इसके बारे में उतना ऑनलाइन डाटा मौजूद नहीं है।
   जिसके तहत यह बताया जा सके की हेलरू क्या है।किस चीज को कहा जाता है। इसी के बारे में हम विस्तार से जानने वाले हैं।हो सकता है आपको थोड़ा सा मालूम भी होगा। अगर आप राजस्थान या गुजरात से हैं तो।
   
क्योंकि दोस्तों यह शब्द राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बहुत ही प्रचलित है।अब क्या है इस शब्द का मतलब आपको यह आर्टिकल पढ़ने के बाद ही पता चलेगा। इसीलिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।ताकि आपको कोई भी कंफ्यूजन ना रहे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं

हेलरू क्या है?

हेलरू क्या है
हेलरू क्या है?

दोस्तों आप यह तो जानते ही होंगे कि भारत में हर राज्य में आदिवासी जनजाति रहते हैं। उनके परंपरा,रीति रिवाज और संस्कृति बहुत अलग होता है।आपको शायद यह भी पता होगा कि भारत में उनके लिए और उनके हितों के लिए एक मंत्रालय भी है जिसका नाम है मिनिस्ट्री आफ ट्राईबल अफेयर्स।
 यह शब्द उसी में से एक जनजाति से जुड़ी हुई है। असल में दोस्तों इस जनजाति का नाम है गरासिया जनजाति है। हो सकता है आपको गरासिया जनजाति के बारे में पता भी हो थोड़ा बहुत।लेकिन आज के यह इस आर्टिकल में हम हेलरू शब्द का बारे में पता तो लगाएंगे ही और तो और हम इस गरासिया जनजाति के बारे में भी विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।
 
 जैसे झारखंड और पश्चिम बंगाल में संथाल जनजाति रहते हैं वैसे ही आपको राजस्थान गुजरात जैसे कुछ कुछ क्षेत्र में भी गरासिया जनजाति देखने को मिलेंगे। गरासिया जनजाति असल में भील जनजाति से ही संबंधित है।और गरासिया जनजाति में ही एक लफ्ज़ इस्तेमाल किया जाता है। हेलरू!
 हेलरू का मतलब क्या है यही प्रश्न है?

हेलरू का मतलब


दोस्तों गरासिया जनजाति में विकास कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक संस्था बनाया गया था। गरासिया जनजाति के हर स्त्री या पुरुष इस संस्था की मेंबर होता है। गरासिया जनजाति में इसी संस्था को हेलरू कहा जाता है।

गरासिया जनजाति के लोग ज्यादातर राजस्थान में ही मिलते हैं।यह जनजाति मुख्य रूप से उदयपुर ज़िले के खेरवाड़ा, कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया, गोगुन्दा क्षेत्र एवं सिरोही ज़िले के पिण्डवाड़ा में पाए जाते हैं।
गरासिया जनजाति अपने को राजपूतों के वंशज मानते हैं।उनके भाषा में गुजराती, भीली, मेवाड़ी व मारवाड़ी का मिश्रण होता है।

परीक्षाओं की दृष्टि से आपको एक महत्वपूर्ण चीज बता दे की गरासिया जनजाति के लोग समय-समय पर या उत्सव पर नृत्य भी करते हैं। उनमें से वालर, गरबा, गैर, कुदा व गौर गरासियों के प्रमुख नृत्य हैं। 

शायद आप यह तथ्य को पढ़कर गरासिया जनजाति के बारे में और भी जानकारी पाना चाहते होंगे। इसलिए दोस्तों इस आर्टिकल में हमने गरासिया जनजाति को लेकर और भी जानकारियां देने की कोशिश की है।आपको शायद अच्छा लगे।

गरासिया जनजाति के बारे में


पोशाक

वेशभूषा में गरासिया जनजाति की अपनी एक अलग पहचान है।भारत के हर जनजाति के तरह इस जनजाति में भी लोग अपने वेशभूषा के लिए विख्यात है।गरासिया पुरुष धोती कमीज पहनते हैं और सिर पर तौलिया बाँधते हैं। गरासिया स्रियाँ गहरे रंग और तड़क - भड़क वाले रंगीन घाघरा व ओढ़नी पहनती हैं।

विवाह संबंधी रीति

गरासिया जनजाति के बारे में अगर आप जानना चाहते हैं तो आपको उनके विवाह संबंधी रीति-रिवाजों को भी जानना चाहिए। मुख्यत गरासिया जनजाति में तीन विवाह प्रचलन में है।

  1. मौर बाँधिया- इस प्रकार के विवाह में फेरे आदि संस्कार होते हैं।
  2. पहरावना विवाह- इसमें नाममात्र के फेरे होते हैं।
  3. ताणना विवाह- इसमें वर पक्ष कन्या पक्ष को केवल कन्या के मूल्य के रूप में वैवाहिक भेंट देता है।
विधवा विवाह- ये भी प्रचलित हैं।

परिवार

गरासिया जनजाति में पिता परिवार का मुखिया होता है। समाज में गोद लेने की परंपरा भी प्रचलित है। इनके समाज में जाति पंचायत भी होता है। पंचायत का मुखिया 'पटेल' होता है। 

सांस्कृतिक जीवन

इनके प्रतिवर्ष कई स्थानीय मेले लगते हैं। बड़े मेले "मनखारो मेलो" कहलाते हैं। युवाओं के लिए इन मेलों का बड़ा महत्व है।

और दोस्तों मैंने आपको ऊपर ही बताया कि गरासिया जनजाति में नृत्य भी प्रचलित है। उत्सव में या किसी समय पर नृत्य भी किया जाता है।

अर्थव्यवस्था

गरासियों की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन एवं वनोत्पाद के ऊपर निर्भर है। हालांकि दोस्तों अभी के समय में गरासिया जनजाति के लोग बाहर काम के लिए भी जाते हैं।

हेलरू से जुड़ी कुछ सवाल जबाब


1) हेलरू क्या है?
उत्तर:- गरासिया जनजाति के विकास कार्य के लिए एक सहकारी संस्था बनाया गया है जिससे हेलरू कहा जाता है।

2) हेलरू शब्द किस जनजाति से संबंधित है?
उत्तर:- ये गरासिया जनजाति से संबंधित है।

3) गरासिया जनजाति कहां पाया जाता है?
उत्तर:- ज्यादातर राजस्थान में ये लोग रहते हैं।

Conclusion


मैंने दोस्तों आज के टॉपिक के साथ-साथ कुछ और चीज भी डिटेल में बात की है।आप शायद यह चीजें यानी गरासिया जनजाति के बारे में भी पढ़ लिए होंगे।हो सकता है आपको हेलरू के बारे में विस्तार से मालूम चल गया होगा।शायद आप इस आर्टिकल से कुछ ना कुछ नई जानकारी जरूर जाने होंगे। आशा है आप को आर्टिकल पढ़कर जरूर अच्छा लगा होगा

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तो आजके लिए इतना ही आपसे फिर मुलाकात होगा एक नए और Knowledgefull पोस्ट के साथ।तब तक के लिए खुश रहिए और मजे में रहिए।
                           जय हिंद
                                बंदे मातरम

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